Saturday, 25 January 2014

बिगड़ न जाये कहीं कल यह मौसम

बिगड़ न जाये कहीं कल यह मौसम
अपना सारा काम आज निपटा लो
गीले कपडे सुखा लो, धुप लगा लो
रजाई और गर्म कपड़ों को धुप दिखा लो

कल यह धुप रहे न रहे, यह मौसम कैसा हो
धुप में जाकर अपने बदन को सेक लगवा लो
कोहरा तो आता जाता रहेगा,क्यूं घबराते हो
हाथ आया समां , बस यूंही न गवा दो !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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