चाहूँगा मैं तुझ को
मेरा चाहने में क्या
मोल लगता है ?
तुझे देख देख
कर में रोता हूँ
तू मुझे देख देख
कर हँसता है !!
दुआ ऐसी हो जाये
की में रो रो कर
तुझे बस हंसाता
रहूँ, मेरे श्याम
मुरली वाले **
तेरी चाहत ही कुछ
ऐसी है की मिलन
को दिल तड़पता है
तुझे मिलने
को आता हूँ तो
तुम भाग जाते हो
अपने पांव से
लाचार है यह सुदामा ++
तुमको रुलाने में
मजा आता है और
मुझे तुम को हंसाने
में मजा आता है
कभी तो तरस खा जाओगे
जब इस रोते हूए
दिल पर रहम खाओगे !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
मेरा चाहने में क्या
मोल लगता है ?
तुझे देख देख
कर में रोता हूँ
तू मुझे देख देख
कर हँसता है !!
दुआ ऐसी हो जाये
की में रो रो कर
तुझे बस हंसाता
रहूँ, मेरे श्याम
मुरली वाले **
तेरी चाहत ही कुछ
ऐसी है की मिलन
को दिल तड़पता है
तुझे मिलने
को आता हूँ तो
तुम भाग जाते हो
अपने पांव से
लाचार है यह सुदामा ++
तुमको रुलाने में
मजा आता है और
मुझे तुम को हंसाने
में मजा आता है
कभी तो तरस खा जाओगे
जब इस रोते हूए
दिल पर रहम खाओगे !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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