Friday, 3 January 2014

नशा बस नशा ??

नशा शराब का हो
या प्यार का
या फिर तेरे 
इन्तेजार का

तडपा ही
जाता है
रह रह कर
जब इस
दिल में
ख्याल आता है
की तून होती
तो ऐसा होता
तून होती
तो वैसा होता
तून नहीं है
तो ऐसा है
तून होगी तो कैसा होगा ??

नशे वाला नशा नहीं
छोड़ सकता
प्रेम करने वाला
प्रेम
और
इन्तेजार करने
वाला
इन्तेजार
चाहे वो मिले
या
न मिले
????

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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