Thursday, 30 January 2014

खूबसूरती ....दो दिन की है.

खूबसूरती ....दो दिन की है.
इस पर कभी नाज न करना
शाम होते ही ढल जाएगी
इस का कभी गुमान न करना !!

बड़े बड़े आये..और स्वाद लेकर 
चल बसे .न जाने किस जहान में
यह छल कपट की है दुनिया
इसका कभी ऐतबार न करना !!

चलते चलते सरे राह निगल जाएगी
तेरी जेब से हर चीज फिसल जाएगी
रोके से भी न रूकेगी कोशिश कर लेना
बड़ी जालिम है, तून विश्वाश न करना !!

कहती कुछ और करती कुछ है
समझती कुछ, समझाती कुछ है
जिओ तो जीने न दे मार देती है
इस का कभी सच यकीन न करना !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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