Thursday, 16 January 2014

ख्वाब

ख्वाबों में छुपा कर 
तुम को में रख
लूँगा अपने 
चमन में
जब याद आएगी
तुम्हारी
तो बुला लूँगा
की हम सफ़र
बन कर
मेरी राहों 
में मेरे
साथ साथ
चलना
न भटक जाये
यह राही
बस बनकर
हम राही
तुम मेरे
साथ साथ
ही चलना

कल मिलते हैं
नमस्कार
आपका
अपना
अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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