ख्वाबों में छुपा कर
तुम को में रख
लूँगा अपने
चमन में
जब याद आएगी
तुम्हारी
तो बुला लूँगा
की हम सफ़र
बन कर
मेरी राहों
में मेरे
साथ साथ
चलना
न भटक जाये
यह राही
बस बनकर
हम राही
तुम मेरे
साथ साथ
ही चलना
कल मिलते हैं
नमस्कार
आपका
अपना
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
तुम को में रख
लूँगा अपने
चमन में
जब याद आएगी
तुम्हारी
तो बुला लूँगा
की हम सफ़र
बन कर
मेरी राहों
में मेरे
साथ साथ
चलना
न भटक जाये
यह राही
बस बनकर
हम राही
तुम मेरे
साथ साथ
ही चलना
कल मिलते हैं
नमस्कार
आपका
अपना
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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