Thursday, 30 January 2014

तुम चुप इतना हो

तुम्हारी खामोश निगाहों को पढने 
की मुझे आदत सी हो गयी है
तुम चुप इतना हो की अंधेरो
को सहमने की आदत सी हो गयी है !!

न खामोश रहा करो इतना की
उजाला न बरस सके सामने
तुम को अपने अंदर गम छिपाने
की आदत सी हो गयी है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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