जब से देखा है तेरा गोकुल धाम
मोरा दिल रोता है सुबह और शाम
कैसी लीला दिखा दी तूने मेरे कान्हा
में तो हो गया हूँ अब बेनाम !!
कैसा अभागा हूँ मैं दुनिया में
तेरे साथ को तरसता रहता हूँ
जिन्दगी की शाम ढल रही है
दे दे दर्शन अब आकार मेरे श्याम !!
कौन सा अपराध हो गया है जो
मैं भटकता रहता हूँ राहों में,तेरे
दर पर आकर बैठा हूँ कब से ,नहीं
करने देता कोई तेरा दर्शन मेरे श्याम !!
इस गरीब के खाते में कुछ नहीं
है तुझे भेंट चढ़ाने को मेरे कान्हा
दो बूँद आंसू की लेकर आया हूँ
बस तेरे चरणों में भेंट चढ़ने को !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
मोरा दिल रोता है सुबह और शाम
कैसी लीला दिखा दी तूने मेरे कान्हा
में तो हो गया हूँ अब बेनाम !!
कैसा अभागा हूँ मैं दुनिया में
तेरे साथ को तरसता रहता हूँ
जिन्दगी की शाम ढल रही है
दे दे दर्शन अब आकार मेरे श्याम !!
कौन सा अपराध हो गया है जो
मैं भटकता रहता हूँ राहों में,तेरे
दर पर आकर बैठा हूँ कब से ,नहीं
करने देता कोई तेरा दर्शन मेरे श्याम !!
इस गरीब के खाते में कुछ नहीं
है तुझे भेंट चढ़ाने को मेरे कान्हा
दो बूँद आंसू की लेकर आया हूँ
बस तेरे चरणों में भेंट चढ़ने को !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
No comments:
Post a Comment