Sunday, 19 January 2014

जीवन के पथ पर चलता चल

जीवन के पथ पर
तून चलता जा प्राणी
न डर किसी से
न खौफ मन में रख

तेरा भला सोचेगा
ऊपर वाला
इंसान के बस
में कुछ नहीं देने को, 
जो भी देगा, 
वो हो देगा
ऊपर वाला

रास्ता कितना भी
कठिन क्यों न हो ,
उस पर चलना ही
जिन्दगी है,
रुकना तो बुझदिलों
का काम है,
उस से निकलना ही
जिन्दगी है

दुनिया सतायेगी
और रुलाएगी
नहीं कदम बढ़ाने देगी
उस तूफ़ान से
खुद को निकालना
ही तो जिन्दगी है

बस अपने क़दमों को
हमेशां बढ़ाते रहना,
अगर डगमगाने
लगे तो खुद संभाल लेना
कठिनाईयों का दौर है
यूं ही गुजर जायेगा
देखना कल फिर तेरी
जिन्दगी में बनकर
एक नया सवेरा आएगा !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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