Thursday, 2 January 2014

****** पल दो पल का शायर ******

में पल दो पल का शायर हूँ
पल दो पल मेरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है
पल दो पल मेरी जवानी है...

सच है यह दो पल हैं मेरे
इस पल की कीमत जान लो
न जाने कितने आये इस में
कब आये और कब चले गए...

जीवन का भंवर इस समंदर है
इस में अनेकों डूब गए
कोई नहीं है यहाँ का राजा बना
पोरस और सिकंदर तक डूब गए...

यह दुनिया नहीं विरासत किसी की
हर इंसान यहाँ पर एक बुलबुला है
कल तक था छोड़ा उस प्यारे को
आज कल में अब नंबर मेरा है...

कह दो प्यार के बोल इक दूजे से
न छल कपट का दिल में रेला है
कह दो गे तो कह देना "अजीत" से
नहीं रखना अपन्मे दिल में मैला है...

अजीत कुमार तलवार
मेरठ


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