Saturday, 4 January 2014

जरूरी नहीं खुशियन रोज मिले

यह जरूरी नहीं की खुशिओ का 
रोजाना सामना हो जाये
और यह भी जरूरी नहीं की रोज
गमो का सामना हो जाये

बस तकदीर में जो लिखा
है उस विधाता ने
मेरा कहना की है की
रोज वो हो जाए

सर झुकेगा बस तेरी
रहमत का असर
मेरे संसार पर हर
बार हो जाये

कश्तिओं को किनारा
तेरे ही बल से रहेगा
संसार में बस खुदा
नदिओं सा प्रेम
सदा बह जाये

रोके से न रुक सकेगा
तेरी रहमत का मेला
"अजीत" दुआ करता है
तून सरे शाम हो जाये !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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