यह जरूरी नहीं की खुशिओ का
रोजाना सामना हो जाये
और यह भी जरूरी नहीं की रोज
गमो का सामना हो जाये
बस तकदीर में जो लिखा
है उस विधाता ने
मेरा कहना की है की
रोज वो हो जाए
सर झुकेगा बस तेरी
रहमत का असर
मेरे संसार पर हर
बार हो जाये
कश्तिओं को किनारा
तेरे ही बल से रहेगा
संसार में बस खुदा
नदिओं सा प्रेम
सदा बह जाये
रोके से न रुक सकेगा
तेरी रहमत का मेला
"अजीत" दुआ करता है
तून सरे शाम हो जाये !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
रोजाना सामना हो जाये
और यह भी जरूरी नहीं की रोज
गमो का सामना हो जाये
बस तकदीर में जो लिखा
है उस विधाता ने
मेरा कहना की है की
रोज वो हो जाए
सर झुकेगा बस तेरी
रहमत का असर
मेरे संसार पर हर
बार हो जाये
कश्तिओं को किनारा
तेरे ही बल से रहेगा
संसार में बस खुदा
नदिओं सा प्रेम
सदा बह जाये
रोके से न रुक सकेगा
तेरी रहमत का मेला
"अजीत" दुआ करता है
तून सरे शाम हो जाये !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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