Tuesday, 24 December 2013

जन्नत है ये आकाश

जन्नत है यह आकाश
जन्नत है खुदा कि रहमत
बाकि सब शमशान !!

हसरतों को पूरा करती
यह पानी और हवा
उस के नूर कोई कौन समझा
नहीं पैदा हुआ कोई दूजा , खुदा !!

जानते हैं हम सब
फिर भी अनजान हैं
लोगो कि जुबान तो हैं
लेकिन फिर भी अनजान हैं !!

मेहनत करना शान के खिलाफ है
छीन कर लेना जैसे अधिकार है
धरती नै पैदा किया कितना कुछ
फिर भी लेने वाला परेशान हैं !!

आओ मिलकर यह काम करें
न कभी किसी को परेशां करें
जीवन में जीना सब का अधिकार है
फिर देखो स्वर्ग सा लगता संसार है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ
www.ajitkavita.blogspot.com

जन्नत है यह धरती
जन्नत है यह आकाश
जन्नत है खुदा कि रहमत
बाकि सब शमशान !!

हसरतों को पूरा करती
यह पानी और हवा
उस के नूर कोई कौन  समझा
नहीं पैदा हुआ  कोई दूजा , खुदा !!

जानते हैं हम सब
फिर भी अनजान हैं
लोगो कि जुबान तो हैं
लेकिन  फिर भी अनजान हैं  !!

मेहनत करना शान के खिलाफ है
छीन  कर लेना जैसे अधिकार है
धरती नै पैदा किया कितना कुछ
फिर भी लेने वाला परेशान हैं  !!

आओ मिलकर यह काम करें
न कभी किसी को परेशां करें
जीवन में जीना सब का अधिकार है
फिर देखो स्वर्ग सा लगता संसार है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ
www.ajitkavita.blogspot.com

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