Monday, 2 December 2013

गुनाह करो कुछ ऐसा

गुनाह करो तुम कुछ ऐसा
कि ऊपर वाला भी कायल हो जाये
चीरती हुई भीड़ में जैसा कोई 
भेड़िया बब्बर शेर हो जाये !!

बेगुनाह को सजा दे देते हैं
जमाने में अदालत के जज
मजा तो तब देखने में आता
है, जब इनको सजा देते हैं सब !!

मंजिल तेरी और है, क्यों भटकता
रहता है दुनिया में बेख़ौफ़ बन्दे
रास्ता तो सच कि तरफ भी जाता है
छोड़ दे सारे के सारे गोरख धन्धे !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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