तेरी आगोश में मैं सर रख कर
भूल जाता हूँ गम सारे जहान के
एक तेरा दरबार ही तो है दुनिया
में निराला ,जहाँ आकर बड़े से
बड़े लोग सर झुकाते हैं !!
एहंकार क्या चीज है दुनिया में
निराले ही यहाँ आकर समझ
पाते हैं इस पथ की बेला को
वरना तो सारा जहाँ पता नहीं
खोया है किस घमंड करने
जैसे झमेलों को !!
अगर मेरे राम तून न होता
तो दुनिया लूट कर खा चुकी
होती एक दूसरे को,बस तेरी
मूरत के सामने आकर बड़े
से बड़ा माफ़ करने की गुजारिश
करता है अपने किये पापों पर !!
तेरा दरबार है इतना खूबसूरत
की न होगा किसी का बना हुआ
महल इस दुनिया में
लोगो के खाली हो जायेंगे सारे
खजाने, पर तेरी रहमान रोज
बरसती हैं उन सब के खजाने में !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
भूल जाता हूँ गम सारे जहान के
एक तेरा दरबार ही तो है दुनिया
में निराला ,जहाँ आकर बड़े से
बड़े लोग सर झुकाते हैं !!
एहंकार क्या चीज है दुनिया में
निराले ही यहाँ आकर समझ
पाते हैं इस पथ की बेला को
वरना तो सारा जहाँ पता नहीं
खोया है किस घमंड करने
जैसे झमेलों को !!
अगर मेरे राम तून न होता
तो दुनिया लूट कर खा चुकी
होती एक दूसरे को,बस तेरी
मूरत के सामने आकर बड़े
से बड़ा माफ़ करने की गुजारिश
करता है अपने किये पापों पर !!
तेरा दरबार है इतना खूबसूरत
की न होगा किसी का बना हुआ
महल इस दुनिया में
लोगो के खाली हो जायेंगे सारे
खजाने, पर तेरी रहमान रोज
बरसती हैं उन सब के खजाने में !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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