Friday, 13 December 2013

मेरी आत्मा

लाख तूफ़ान आयेंगे, तो आ जाने दो
में वो आत्मा हूँ, जो रोके से नहीं रूकती
घरोंदा तो मेरा परलोक में है, मेरे लिए
किस काम कि है, यह सारी दुनिया !!

जब आया था यहाँ, तो बहुत रोया था
आज जब जाऊँगा, तो सब को रुला जाऊँगा
किराये का मकान था, मालिक ने खाली करा दिया
सब साथ अपने कर्मो का पिटारा ले जाऊँगा !!

जितना भी कटा यह जीवन उस की मैहर से
रफ्ता रफ्ता अब आगे बढ़ता चला जाऊँगा
रोकने और रूकने का वक्त खत्म हो गया है
साथ सरे संसार कि यादे साथ ले जाऊँगा !!

दुनिया एक खिलोने से कम नहीं है यहाँ
चाबी के साथ ही साँसे थम जायेंगी
रुसवा नहीं करने को दिल कहता है
बस खुदा का बुलावा है "अजीत"में चला जाऊँगा !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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