Wednesday, 11 December 2013

एक बुझ दिली का उठा कदम ...ख़ुदकुशी

सुसाइड बुझदिली के सिवा कुछ नहीं है, 
जिन्दा दिली तो जीवन जीने में है,
मरना आसान इतना है,
जैसे पानी में एक पथेर डाल देना,
भगवान् का यह दिया रूप है, 
यूं न गवा डालो, 
तुम तो जान छुड़ा लोगे,
क्या हाल होगा परिवार का 
मरने से पहले जरा इस पर भी नजर डालो,

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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