Wednesday, 4 December 2013

कुछ देर पहले ही देखा मैने, 
नवाज शरीफ ने फिर किया 
अपनी आँखों से फेर
भूल गया जब तलक था
गद्दी से दूर
भ्रम में न रहना
अब कि बार हो जाएगा
तेरा चकनाचूर

पहला कारगिल का युद्ध
याद नहीं आ रहा है क्या
क्यों अपने घर में बैठ
कर, हम को ललकार
रहा है क्या

अब कि बार तुझे ऐसा
मजा चखा देंगे
तेरी आने वाली सात
पीढ़िया इस गद्दी पर
बैठने का कभी
नाम भी नहीं लेंगे

बस यहाँ एक कमी है
महात्मा गाँधी ने चुप कर
रखा है हमारे नेताओं को
थोडा सा भी बस चलता अगर
हमारी सेनाओ का
तोड देते आकर तेरे देश
के नपुंसक इरादों को

पंगा लेने से पहले अब कि बार
सौ सौ बार सोच लेना नवाज शरीफ
कहीं ऐसा न हो हम सब मिलकर
कर दे तेरे देश को दुनिया के नक्शे
से बदरंग,
क्योंकि यह भारत देश है,
अभिऊ तुमने नहीं देखे
इस के अनेकों रंग !!!!!

जय हिन्द, जय भारत
अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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