Thursday, 26 December 2013

फिर से शपथ

फिर से शपथ

में गीता पर हाथ रख कर
आज खा रहा हूँ कसम
की में कभी भी संविधान
की अवहेलना नहीं करूंगा
और भारत देश के प्रति
अपनी आस्था रखूंगा
चाहे मुझे कितना ही कष्ट
क्यों न हों, में अपने पद
की गरिमा को कलंकित
नहीं करूंगा  !! वगेरा वगेरा

फिर भी कसम खाने के
बाद न जाने कितने
ही उच्च पद के लोग
निभा न सके अपने पद
की गरिमा को, न ही
संविधान के प्रति अपनी
आस्था को, चले थे घर से
चन्द सिक्को को लेकर,.
पर आज न जाने कहाँ से
भर गए उनके घरो के थैले
न निभा सके वो कसमे और
न निभा सके वो वादे,
बस अपना घर भर कर
काम यह ऐसा किया, की
अपने परिवार के लिए
जन्मो जन्मो तक का धन
इकठा किया,

क्यों खाते हो झूटी कसमे
क्यों करते हो वफादारी का ढोंग
क्यों बहकाते हो लोगो को
क्यों खेलते तो भावनाओ से

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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