Monday, 30 December 2013

सच की कोई कीमत नहीं बाज़ार में

कीमत नहीं है आज दुनिया के बाजार में
उस बात की जो सच को बेचता है सरे बाजार में
मिल जाते हैं झूठ का साथ देने वाले अनगिनत
कुछ भी बेच जाते हैं भरे  पुरे बाज़ार में !!

ताकता रहता है वो किसी ऐसे ग्राहक को
जो आकर लगा दे कीमत उस के सामान की
शाम तक ऑंखें भी थक गयी न कोई मिला ऐसा
जी कीमत दे सके, सच बेचने वाले इंसान की !!

दुनिया में झूठ का बहुत बोलबाला है
एक अबला चली बेचने अपना सच का आला है
फरेबिओं ने साथ देने को सच कह दिया उस से
पर लूट कर खा लिया उसको रहा झूठ का बोलबाला है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ



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