Sunday, 15 December 2013

सच कहना अच्छा लगता है

कहना मुझे अच्छा लगता है
क्योंकि में सच के देता हूँ,
झूठ बोलने से पहले मेरी
जुबान लडखडा जाती है !!

अगर झूठ तुमको पसंद है
यह तुम्हारी आदत में है
मुझे क्यों अपनी इस आगोश
में शामिल करवाती हो !!

एक पल के सच को सच
न मान सकी हो तुम
तो क्या फायदा में झूठ
कि दलीले सुनाता रहू रात भर !!

जो पल गुजर रहा है जान लेना
यह सच को दिखा रहा है
आने वाला कल तो झूठ कि
बुनियाद बना रहा है !!

एक करवट बदलूँ पता नहीं न बदल सकूं
तुम झूठ में मेरा दिल न बहलाओ
समय गुजरते देखा है मैने
कल क्या समय हो,यह न देख सकूं गा में !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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