"""""""" भारत कि नई सत्ता """""""""
कहते थे बाहर से अब चखने का समां आ गया
न जाने कितना दर्द सहा था लोगों ने आम के लिए
केजरीवाल को सिरमौर बनाने का समां आ गया
तुम क्या थे, क्या क्या किया था कल तक तुमने
सारी छान बीन करने का अब मेरा मौसम आ गया
बड़ा सताया था आम आदमी को तुमने चुनाव से पहले
अब मेरी सरकार बन्नने का समां नजदीक आ गया
आम आदमी की पार्टी को आम समझना हुआ मुश्किल
अब आम मेरे और तुम्हारा गुठली खाने का मौसम आ गया
पब्लिक का समर्थ, और उन का साथ निभाने का और
सत्ता से गुंडा गर्दी भागने का मौसम आ गया
अपने कर्मो का हिसाब तो सब को देना ही पड़ेगा अब
कितना दम है मुझमे , यह दिखने का मौसम आ गया
अजीत कुमार तलवार
मेरठ

No comments:
Post a Comment