मैं आते जाते
ताकती रहती हूँ राह तेरी
दिन रात रह रहकर
आती रहती है याद तेरी
यह लम्हा बना दुःख देता है
जब तक नहीं दिखती सूरत तेरी
आ जा इक झलक दिखला जा
बुझे दिल को, मिलेगी सौगात ,
वो तेरी
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
ताकती रहती हूँ राह तेरी
दिन रात रह रहकर
आती रहती है याद तेरी
यह लम्हा बना दुःख देता है
जब तक नहीं दिखती सूरत तेरी
आ जा इक झलक दिखला जा
बुझे दिल को, मिलेगी सौगात ,
वो तेरी
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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