अपनी, आन, बान , शान
है, बस एक मुस्कराहट
वो बाजार में खरीदी नहीं जा सकती
जब भी कोई गम तुझ को
सताये मेरे यारा
बस आ जाना मेरे पास
होल सेल में भी
फ्री में बाँट दूंगा तुझे
वो सारी मुस्कराहट
जिस को लेनेके लिए
तो दर दर भटकता है
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
है, बस एक मुस्कराहट
वो बाजार में खरीदी नहीं जा सकती
जब भी कोई गम तुझ को
सताये मेरे यारा
बस आ जाना मेरे पास
होल सेल में भी
फ्री में बाँट दूंगा तुझे
वो सारी मुस्कराहट
जिस को लेनेके लिए
तो दर दर भटकता है
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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