Saturday, 1 February 2014

फिर न जाना छोड़ कर यह मकान

किसी बात का गुमान नहीं मुझको
किस बात का करून में ऐतबार
दुनिया में लोगो का काम जब
कर दो, तो सब लगता है आसान !!

बना लो किसी को अपना,
और बन जाओ किसी के
यह पल यूं ही निकल जायेंगे
समय होता है बड़ा बलवान !!

नजर में अपनी रोजाना आते
हैं, न जाने कितने ऐसे चेहरे
जो नजरे तो मिला लेते हैं
पर बन जाते हैं हमारे मेहमान !!

किस्मत से अगर मिल जाएँ
दोबारा इतेफाक हो सकता है
गुजारिश है उनसे हमारी, की
फिर न जाना छोड़ कर यह मकान !!

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"
मेरठ

No comments:

Post a Comment