प्रकाश ही प्रकाश हो तेरे जीवन में
यह कहते हुए , प्रसन हो रहा हूँ
बस चन्द दिन की बात है,
ख़ुशी से फूला नहीं समां रहा हूँ !!
आएगी वो दुल्हन बनकर
आँगन मेरा महक जायेगा
प्रकाश तेरा है, ओ प्रियतम
प्रकाश तेरा हो जायेगा !!
न जाने कितने दिन से था
अँधेरा मेरे जीवन में ओ प्रिये
तेरे आने से मेरा उजड़ा हुआ
चमन अपने आप खिल जायेगा !!
तुम मुस्कान हो मेरी ,मैं प्रकाश तुम्हारा
हम दोनों के मिलते हैं,चमक जायेगा घर हमारा
तुम को देखूँगा तो दिन निकलेगा
तुमको देखूँगा तो रात होगी
हर सुबह और शाम अब अपने दोनों
के ही नाम होगी !!
बस अपनी झलक दिखला कर खुशियन बिखेर देना
घर द्वार को अपना सब देकर, बगिया फूल खिला देना
हम तो बस आपकी दुआ से, तुम्हारा प्यार चाहते हैं
"अजीत" भाई साहब की कविता का प्यार चाहते हैं !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
यह कहते हुए , प्रसन हो रहा हूँ
बस चन्द दिन की बात है,
ख़ुशी से फूला नहीं समां रहा हूँ !!
आएगी वो दुल्हन बनकर
आँगन मेरा महक जायेगा
प्रकाश तेरा है, ओ प्रियतम
प्रकाश तेरा हो जायेगा !!
न जाने कितने दिन से था
अँधेरा मेरे जीवन में ओ प्रिये
तेरे आने से मेरा उजड़ा हुआ
चमन अपने आप खिल जायेगा !!
तुम मुस्कान हो मेरी ,मैं प्रकाश तुम्हारा
हम दोनों के मिलते हैं,चमक जायेगा घर हमारा
तुम को देखूँगा तो दिन निकलेगा
तुमको देखूँगा तो रात होगी
हर सुबह और शाम अब अपने दोनों
के ही नाम होगी !!
बस अपनी झलक दिखला कर खुशियन बिखेर देना
घर द्वार को अपना सब देकर, बगिया फूल खिला देना
हम तो बस आपकी दुआ से, तुम्हारा प्यार चाहते हैं
"अजीत" भाई साहब की कविता का प्यार चाहते हैं !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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