Tuesday, 25 February 2014

तेरा प्यार , तेरा करार और तेरा वो इन्तेजार

तेरा प्यार , तेरा करार और तेरा वो इन्तेजार
सब में दीखता है, बस तेरा प्यार ही प्यार
तून प्यार की मूरत है सच ओ मेरे यार
फिर क्यों न करून तुझ से प्यार बार बार !!

उन लम्हों की कसक बन कर आ जाती हो
जिस में से भी आती है , खुशबू की फुहार
इक झरना सा मन को शीतल कर जाता है
जब पड़ती हे चेहरे पर बनके वो सारी धार !!

मन शीतल , चितवन सा बन नाचता है तब यार
कितना प्यार बरसा जाता है , करता नहीं बेकरार
हवा भी साथ साथ उसके गूँजती नजर आ जाती है
जब इक झोका उड़ा कर ले आता है तुम्हारा सारा प्यार !!

उस लम्हे को बाँध कर रखने को रहता है, मन बेकरार
कोयल सी कूक, मुरली सी मधुर मिठास, औ दिलदार
शायद तेरे आने का आगमन का आभास करवा जाती है
यह सब मिलकर, पवन, बहार, कोयल औ मेरे यार !!

अजीत तलवार
मेरठ

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