Thursday, 13 February 2014

जीती जागती दुनिया का पागलपन

जीती जागती दुनिया का पागलपन
आज यह दिन कल वो दिन
कल फूल दिया था, आज मना रहा है
परसों चोक्लेटे खरीदेगा, फिर टेडी का दिन
फिर वादा करेगा, और हग दिन मनायेगा
फिर किस करता हुआ, वैलेंटाइन का दिन आ जायेगा

शामत आ गयी फूलों की , की पागल हो गया जमाना
चोक्लेट की सेल बढ़ा कर, टेडी को भी बना दिया दीवाना
वादा किया है तो निभाना पड़ेगा, हग को भी सुद्रेढ़ बनाना पड़ेगा
चुम्बन लेकर माशूका को सताना पड़ेगा
वाह अंग्रेजो, तुम तो भाग गए यहाँ से
भारत वालो, को वैलेंटाइन का दिन दिखा कर, यह समझाना पड़ेगा

की....इस देश में यह रीत मत डालो
जाकर अपने अपने धर्म का पालन कर डालो
देश के इतने त्यौहार हैं, उन को मनाने में ३६५ दिन कम हैं
क्या भारत देश के त्यौहार, किस दूसरे से कम हैं,
समझ समझ का फेर हैं, बस जहाँ देखो अंधेर ही अंधेर हैं

जश्न मनाओ, अपने देश के त्योहारों का

जय भारत
जय भारत भूमि

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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