Wednesday, 5 February 2014

एक तेरा चेहरा भा गया मुझको

एक तेरा चेहरा भा गया मुझको
की नहीं चाह रही अब कोई बाकी
उस को देख कर मुस्कुरा देता है दिल मेरा
की अब कोई अरमान नहीं रहा बाकी !!

तून हंसती है, तो दिल हंस देता है
तून रोती है, यह सब कुछ खोता है
इस को खुश देख देख कर अब तो
मेरे जीवन का नया सवेरा होता है !!

जब सामने यह आ जाता है तो
दिल का कमल खुद ही खिल जाता है
बिना हवा और पानी के यह ,तेरे
दर्शन से ही, खुश हो जाता है !!

तुझे रब ने बनाया था जिस दिन
भरा दिया था यह एक रंग उस दिन
की बना के सूरत को यूं मुस्कुराती रहना
यही तेरे जीने की कला बनी थी उस दिन !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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