तेरे दिल में जगह बनाने की कोशिश की थी...एक बार
तेरे दिल को भी अपना बनाने की कोशिश की थी..एक बार
पर तेरे गरूर ने न जाने क्या कह दिया
हम से रुख आपने अपना घुमा लिया
कैसे करें इजहारे इ मोहब्बत का अब आप के साथ
हम ने तो अपना सारा जीवन तुम्हारी याद में बिता दिया
जब जीवन निकल गया तो आपने इशारा कर दिया
इस बुझती हुई सांसों को आकर सहारा कर दिया
बस फर्क अब इतना है, की दुनिया अब बेमानी सी लगती है
जब समां था आपके पास, तो आपने झट से पीछा छुड़ा दिया
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
तेरे दिल को भी अपना बनाने की कोशिश की थी..एक बार
पर तेरे गरूर ने न जाने क्या कह दिया
हम से रुख आपने अपना घुमा लिया
कैसे करें इजहारे इ मोहब्बत का अब आप के साथ
हम ने तो अपना सारा जीवन तुम्हारी याद में बिता दिया
जब जीवन निकल गया तो आपने इशारा कर दिया
इस बुझती हुई सांसों को आकर सहारा कर दिया
बस फर्क अब इतना है, की दुनिया अब बेमानी सी लगती है
जब समां था आपके पास, तो आपने झट से पीछा छुड़ा दिया
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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