Tuesday, 26 November 2013

हे भोले नाथ कृपा बरसाओ

मेरे प्रिय मित्रो प्रणाम,
आज हम सभी के लिए बड़े दुःख की घडी है,
मित्रो परसों उत्तराखंड में आई प्राकर्तिक आपदा से हुए
आहत लोगों को देख कर मैं काफी व्यथित हूँ अतः इस
विपत्ती की घड़ी में मैं उन सभी के साथ पूरी हमदर्दी रखते हुए
इस दुःख को सहन करने हेतु परम पिता परमात्मा से प्रार्थना 
करता हूँ की सभी को सहन शक्ति दें !!

हे भोले नाथ कृपा बरसाओ मानवता पर !
आज का मानव अँधा हो गया है धन पर !!
वो भूल गया प्रक्रति को सताना नहीं था !
मगर अपनी कमाई के प्रति वो सजग था !!

भूल चूका वो सारे रिश्ते इस धरती पर !
लालच में आ कर होटल बनाये तेरी धरा पर !!
पैसे में सब कुछ भूल गया न ध्यान तेरे क्रोध पर !
आज जो हाल हुआ देख खुद रोया अपनी भूल पर !!

धरती से खिलवाड़ नमी को भी न छोड़ा उसने !
आज खुद तो लापता है अछों को भी न छोड़ा उसने !!
भोले की लीला नहीं जाना समां गया जल में !
अपनी करनी दूसरों को भी डुबो गया जल में !!

प्रक्रति को न सताओ ऐ धरती पर महल बनाने वालो !
किसी श्रद्धालू के घर में अँधेरा करने वालो !!
उस की तो दुनिया मिट गयी तुम्हारी करनी करने वालो !!
भगवान् के बनाये नियम के विरुद्ध चलने वालो !!

अजीत "करूणाकर"
मेरठ

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