आने वाला है मौसम फिर से
मेरे कान्हा के जनम दिन का,
मिल बाँट कर करेंगे ,
श्रृंगार मेरे कान्हा का !!
फिर से वो झलक
मन को भा जायेगी,
जब किलकारियां कान्हा की
सभी के मन को भा जाएँगी !!
झूले में झूलेंगे मेरे नन्द गोपाल,
बड़ा मन भावन लगे गा संसार,
बस में चल नहीं सकता
पैरों से हो गया लाचार!!
तो देख कर तेरी नगरी में
तेरी लीलाओं का संसार
कान्हा रो रो कर यहाँ
हो रहा मेरा यहाँ बुरा हाल !!
मन में तड़प इतनी है,
कैसे आऊँ तोरी नगरी,
छोड़ गए सब संगी साथी
में पड़ा, यहाँ नहीं मिल रही
तेरे वृन्दावन कि डगरी !!
मेरी दिल की दुआ है,
मेरे कान्हा, कर दो कोंई
चमत्कार , ताकि चलता रहे
सभी का घर द्वार !!
टूटे हुए दिल कि मझदार हो तुम.,
मेरे जीवन के खेवन हार हो तुम,
कर दो आकर उद्धार दोबारा इस जगत का,
क्यों कि जन्म ले लिया हैं कंस ने ,
घर घर हो रहा बहुत अत्याचार
नहीं सुरक्षित कोई, दरोपदी,
और न ही महिलाओं का श्रृंगार!!
अजीत "करुणाकर"
मेरठ
मेरे कान्हा के जनम दिन का,
मिल बाँट कर करेंगे ,
श्रृंगार मेरे कान्हा का !!
फिर से वो झलक
मन को भा जायेगी,
जब किलकारियां कान्हा की
सभी के मन को भा जाएँगी !!
झूले में झूलेंगे मेरे नन्द गोपाल,
बड़ा मन भावन लगे गा संसार,
बस में चल नहीं सकता
पैरों से हो गया लाचार!!
तो देख कर तेरी नगरी में
तेरी लीलाओं का संसार
कान्हा रो रो कर यहाँ
हो रहा मेरा यहाँ बुरा हाल !!
मन में तड़प इतनी है,
कैसे आऊँ तोरी नगरी,
छोड़ गए सब संगी साथी
में पड़ा, यहाँ नहीं मिल रही
तेरे वृन्दावन कि डगरी !!
मेरी दिल की दुआ है,
मेरे कान्हा, कर दो कोंई
चमत्कार , ताकि चलता रहे
सभी का घर द्वार !!
टूटे हुए दिल कि मझदार हो तुम.,
मेरे जीवन के खेवन हार हो तुम,
कर दो आकर उद्धार दोबारा इस जगत का,
क्यों कि जन्म ले लिया हैं कंस ने ,
घर घर हो रहा बहुत अत्याचार
नहीं सुरक्षित कोई, दरोपदी,
और न ही महिलाओं का श्रृंगार!!
अजीत "करुणाकर"
मेरठ

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