मेरे पूज्नीय पिता जी को मेरा और पूरे परिवार का नमन, आज आपका श्राद्ध है, और में चन्द शब्दों के माध्यम से आप को यह छोटी से भेंट कर रहा हूँ, आपका आशीर्वाद हमेशां परिवार पर बना रहे, और हमें रोजाना, हर पल आप का ध्यान करते रहे, ताकि अपनी बाकी जिन्दगी को आपके मार्गदर्शन से चलाते रहें!!
पापा, आप ईश्वर के रुप थे,
पावन सी बेला कि आप धूप थे,
स्नेह भरा स्वरुप थे आप,
खुशियों का आपार भंडार थे आप,
सूर्य का प्रकाश आप से था ,
हम बच्चों के आकाश आप ही थे,
घने पेड़ की छांव भी आप थे,
तुफानों में मजधार आप थे ,
बल, विवेक बुद्धि आप से थी,
साहस की वृधि्द आप से थी,
धैर्य का सागर थे आप,
ज्ञान का भंडार थे आप,
अनुशासन कि पाठशाला आप से थी.
सही मार्ग का मार्गदर्शन आप से था,
सख्त, कठोर, गरम आप थे,
कोमल, तरल, नरम भी आप थे,
आसमान आप थे, वायु भी आप थे,
यज्ञ , मन्त्र आप से था, हवन भी आप थे,
हमारे जीवन का आधार थे आप,
खुशिओं के महकते जज़्बात थे आप,
अजीत"करुणाकर"
मेरठ
पापा, आप ईश्वर के रुप थे,
पावन सी बेला कि आप धूप थे,
स्नेह भरा स्वरुप थे आप,
खुशियों का आपार भंडार थे आप,
सूर्य का प्रकाश आप से था ,
हम बच्चों के आकाश आप ही थे,
घने पेड़ की छांव भी आप थे,
तुफानों में मजधार आप थे ,
बल, विवेक बुद्धि आप से थी,
साहस की वृधि्द आप से थी,
धैर्य का सागर थे आप,
ज्ञान का भंडार थे आप,
अनुशासन कि पाठशाला आप से थी.
सही मार्ग का मार्गदर्शन आप से था,
सख्त, कठोर, गरम आप थे,
कोमल, तरल, नरम भी आप थे,
आसमान आप थे, वायु भी आप थे,
यज्ञ , मन्त्र आप से था, हवन भी आप थे,
हमारे जीवन का आधार थे आप,
खुशिओं के महकते जज़्बात थे आप,
अजीत"करुणाकर"
मेरठ
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