Tuesday, 26 November 2013

गुजरते वक्त में शामिल हो जाऊँगा

गुजरते वकत में शामिल हो जाऊँगा में,
एक तस्वीर बन कर रह जाऊँगा में
खुशिया जितनी भी हैं मेरे दिल के अंदर
आप सभी को बाँट कर चला जाऊँगा में !!

न फरेब जानता हूँ, न छल करना जानता हूँ
दिल पाक साफ़ है मेरा,इसे छोड़ जाऊँगा में,
जितनी जिन्दगी बक्शी है, उस रब ने मुझे,
रोजाना वादा है आप को, हँसता चला जाऊँगा में !!
गमो को सहना सिखा दिया है,वकत ने मुझे
दिल किसी का न दुखे , कभी भी मुझसे,
बस यही कामना करता हूँ रोजाना में रब से,
ख़ुशी ख़ुशी चला आऊँगा ,जब बुलाओ गे मुझे !!

अजीत" करुणाकर"
मेरठ

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