जब भी जी चाहा, नई दुनिया बसा लेते हैं लोग,
एक चेहरे पे, केई चेहरे, लगा लेते हैं लोग
अपने हाथ कि कठपुतली समझ कर
न जाने क्या क्या सुना देतें हैं लोग !!
जानत अनजाने अगर कुछ के दो इनसे,
नई नई बातें बना लेते हैं यह लोग,
अपने दुखो से तो परेशान होते नहीं हैं
पर दूसरों के सुख में टांग अड़ा लेते हैं यह लोग !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
एक चेहरे पे, केई चेहरे, लगा लेते हैं लोग
अपने हाथ कि कठपुतली समझ कर
न जाने क्या क्या सुना देतें हैं लोग !!
जानत अनजाने अगर कुछ के दो इनसे,
नई नई बातें बना लेते हैं यह लोग,
अपने दुखो से तो परेशान होते नहीं हैं
पर दूसरों के सुख में टांग अड़ा लेते हैं यह लोग !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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