Tuesday, 26 November 2013

मेरी भावना देश के प्रति

मेरी "भावना"
आज अपने देश वासिओं के प्रति और उनके प्रति जो प्रेम को सब कुछ मानते हैं

"भावना " ऐसी पैदा करो,
कि उजड़ा गुलशन भी गुले गुलज़ार हो जाये,
अगर न भी हो किसी को किसी के साथ,
तो भी उस से प्यार हो जाये !!

मानवता तो यही कहती है,
कि दिल न किसी का दुखाओ,
अगर वहां फूल न खिला सको,
तो कम से कम कांटे तो न चुभाओ !!

भाव अगर इंसान के अच्छे होंगे,
भावनात्मक तो बन ही जाएगा,
हिंसात्मक बनते बनते भी वो
मेरे ख़याल से अहिंसात्मक तो
बन ही जाएगा !!

गुलशन को महकाना सीख जाएगा
फूलों को खिला कर महकाना सिख जाएगा
"भावना" से प्यार करते करते वो
भावनात्मक जरूर बन जाएगा !!

अजीत"करुणाकर"

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