जब सबका मालिक एक
तो फिर क्यों बन्दे तू परेशान है ?
जब सब कुछ उसके हाथ
तो फिर क्यों बन्दे तू हैरान है ?
नित्य कर्म में शामिल करो
रोजाना हरि का जाप किया करो,
मन के अंदर झांको उस दीये की लों को,
अरे बन्दे जानकर भी तू अनजान है ,
क्या रखा है बाहरी आडम्बरों में,
तू जान न जान , पर वो तेरा राजदार है !!
अजीत कुमार तलवार
अजीत "करुणाकर"
मेरठ
तो फिर क्यों बन्दे तू परेशान है ?
जब सब कुछ उसके हाथ
तो फिर क्यों बन्दे तू हैरान है ?
नित्य कर्म में शामिल करो
रोजाना हरि का जाप किया करो,
मन के अंदर झांको उस दीये की लों को,
अरे बन्दे जानकर भी तू अनजान है ,
क्या रखा है बाहरी आडम्बरों में,
तू जान न जान , पर वो तेरा राजदार है !!
अजीत कुमार तलवार
अजीत "करुणाकर"
मेरठ
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