Tuesday, 26 November 2013

नरेंदर मोदी पर एक कविता

आज देख कर प्रचंड रूप,
नरेंदर मोदी के स्वरुप का
वाशिन्गटन तक का किला
हिल गया google सर्च पर !

दुनिया ने माना कि यह
इंसान काम के लायक होगा
दुनिया कि मिलती भावनाओ
को यह नहीं देगा धोखा !

जैसी छवि आज बनाई हे आपने
सारे अरमान संजोये हैं आपने
कथनी और करनी में अन्तर न होने देना,
नरेंदर मोदी हो, और यह सिद्ध कर के रहना !!

आज जरूरत है, बुलंद होंसले वाले इंसान की,
जिस से हिल जाएँ दीवारे पडोसी देश के मकान की
थर्रा उठे वो धरती जहाँ पर पैर पड़ें बलवान के
भारत देश को जरूरत है, तुम जैसे इंसान की !!

इक नई महाभारत कि जरूरत आन पड़ी है देश में,
अपने देश में सब कुछ है, क्या रखा है विदेश में ,
इस मुल्क को वर्ल्ड में ऐसा चमका देना
हर पर घबराहट होती रहे, विदेश में !!

अजीत "करुणाकर"
मेरठ


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