मैं प्रेमी हूँ, और प्रेम की भाषा जानता हूँ !
अपना बनाना चाहता हूँ, औरो का बनना चाहता हूँ !
प्रेम उस दुनिया से सीखा जहाँ बात होती थी हिंसा की !
मरने की और मार कर खुश होने की !
दिल में दर्द रहता था की इस कौम को बदल दूंगा !
नफरत करने वालो के सीने में प्यार भर दूंगा !
मिटा दूंगा वो दूरियां जो आग बरसाती हैं !
याद तेरी मुझे बस, तेरी याद आती है !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
अपना बनाना चाहता हूँ, औरो का बनना चाहता हूँ !
प्रेम उस दुनिया से सीखा जहाँ बात होती थी हिंसा की !
मरने की और मार कर खुश होने की !
दिल में दर्द रहता था की इस कौम को बदल दूंगा !
नफरत करने वालो के सीने में प्यार भर दूंगा !
मिटा दूंगा वो दूरियां जो आग बरसाती हैं !
याद तेरी मुझे बस, तेरी याद आती है !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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