कश्तियाँ किनारों कि तलाश में
डगर डगर डोलती जाती हैं,
तमनाएं इंसान कि इसी प्रकार
भंवर में फंसती जाती है !!
लोग उस में बैठ कर पानी
से हठ खेलियाँ करते जाते हैं
इंसान भी तो अपनी अपेक्षाओं
से खिलवाड़ करते जाते हैं !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
डगर डगर डोलती जाती हैं,
तमनाएं इंसान कि इसी प्रकार
भंवर में फंसती जाती है !!
लोग उस में बैठ कर पानी
से हठ खेलियाँ करते जाते हैं
इंसान भी तो अपनी अपेक्षाओं
से खिलवाड़ करते जाते हैं !!
अजीत कुमार तलवार
मेरठ
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