Tuesday, 26 November 2013

इंसान

लाख ताकत हो अपने पैरों में
गिर कर संभल सकता है........................इंसान
एक बार जो नज़रों से गिरा जमाने के,
फिर नहीं संभल सकता है.......................इंसान,

जिन्दगी गुजर जाती है,
अपनी साख को बनाने में,ए ...................इंसान,
फिर तून अपनी बनी हुई
साख को क्यों लगा मिटाने , ए.................इंसान !!

अजीत"करुणाकर"
मेरठ

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