Tuesday, 26 November 2013

हे गौ माता क्या लिखा है विधाता ने..


तेरी तक़दीर यह कैसी लिखी है
विधाता ने,
तून सब कि गौ माता है
तेरा हम सभी के साथ
तो जन्म जन्म का नाता है

चाकू चलाने वाले उन निर्दई लोगो
को क्यूं रहम तुझ पर न आता है
जब तेरे अंदर करोडो रूप में
समाया हुआ खुद वो विधाता है

चाकू कि धार अगर वो खुद
अपने गले पर चला कर जरा देखें तो
पता चलेगा कितना और किस तरह
का दर्द जब अपनी नसों पर होता है !!

मांस खाने वालो , अगर मांस इतना अच्छा लगता है
एक बार मेरा कहा मान लों और चाकू को अपने
किसी दोस्त के गले पर उत्तर दो, फिर उस का मांस
खा कर देखो, किसी गाय का क़त्ल कैसा होता है !!

रूह काँप उठेगी तुम्हारी, जब यह लीला होगी न्यारी,
देखेगी उस प्रचंड रूप को , दोस्तों यह दुनिया सारी
कत्ल करना कितना आसान यह उस निर्जीव का ,
जो कह न सके दुनिया में, अपनी व्यथा यह भारी !!

गाय के कत्ल का बदला, कत्ल से ही लिया जाएगा
खून उस निर्जीव का बहाया तो तुम्हारा भी बहाया जाएगा
गर नजर आ गया अब कोई ,इस के साथ इन्साफ करता धरती पर
मेरी इच्छा यह है, कि सब मिल कर सर्वनाश हमारे हाथ से किया जाएगा !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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