कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना
जो रूखा सूखा दिया हमें, तू उस का भोग लगा जाना..!!
तेरा दिया , रोज खा कर तेरा शुक्र गुजार कर लेते हैं
ओ पहाड़ों वाली महारानी, फिर क्यूं इतना दुःख सब सहते हैं !!
निर्धन की झोली तू भर देती, तू दुनिया में निराली है
तेरी शान , तेरी आन, सब इस कुछ भारत की तू रखवाली है !!
पथरीले पथ पर चल कर लोग, कभी आ जाते थे तेरे दरबार
आज तेरे भवन की शान , वो रस्ते सारे दुनिया में आली है !!
मेरे विनती तो बस यही है मेरी माँ, दे आशीर्वाद सब भगतो को
तेरी याद में जियें, तेरी याद में मरे, सच तू दुनिया भर में बलशाली है !!
अजीत तलवार
मेरठ
जो रूखा सूखा दिया हमें, तू उस का भोग लगा जाना..!!
तेरा दिया , रोज खा कर तेरा शुक्र गुजार कर लेते हैं
ओ पहाड़ों वाली महारानी, फिर क्यूं इतना दुःख सब सहते हैं !!
निर्धन की झोली तू भर देती, तू दुनिया में निराली है
तेरी शान , तेरी आन, सब इस कुछ भारत की तू रखवाली है !!
पथरीले पथ पर चल कर लोग, कभी आ जाते थे तेरे दरबार
आज तेरे भवन की शान , वो रस्ते सारे दुनिया में आली है !!
मेरे विनती तो बस यही है मेरी माँ, दे आशीर्वाद सब भगतो को
तेरी याद में जियें, तेरी याद में मरे, सच तू दुनिया भर में बलशाली है !!
अजीत तलवार
मेरठ
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