Monday, 21 April 2014

************* तुझ सा इक दोस्त चाहिए ******

************* तुझ सा इक दोस्त चाहिए ***********

कहते हैं कहने वाले की दुनिया बड़ी खूबसूरत है
में कहता हूँ, कि आप हैं तो तब यह खूबसूरत है !!

न होते आप, तो कैसे चलता यह दुनिया का चलन
हर इंसान का एक दुसरे से, बताओ ? कैसे होता मिलन !!

बगिया तो ऊपर वाले ने कुछ सोच कर ही बनाई थी
एक एक चुन चुन का अपने हाथो से सजाई थी !!

पर कुछ रहनुमा हैं जिस के आशीर्वाद से हम जिन्दा हैं
बस आज के हालत देख कर ,सच बहुत शर्मिंदा हैं !!

आपसी भाईचारे को लोग यहाँ कॅश करने पर उतारू हैं
उन की नजर में तो जैसे सब यहाँ पर दोस्त बजारू हैं !!

अपने रूत्वे पर कभी घमण्ड न कर ओ दुनिया में मुसाफिर
उस की लाठी में आवाज नहीं होती ,वो कब बन जाये काफ़िर !!

प्यार की सौगात जो उस ने दी है, तू उस को यहाँ बांटता जा
"अजीत" तेरे जैसा यार सब को दे, यह दुआ तू करता हुआ जा !!

जय माता दी

अजीत तलवार
मेरठ


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