Monday, 21 April 2014

***********नहीं मतदान किया ***********

*************नहीं मतदान किया ******************

कशमकश भरी जिन्दगी में, लोक सभा का मतदान हो रहा
कोई किसी को, कोई दुसरे को यहाँ भाई , चोर कह रहा है 
अपनी बगल में बैठा रखा है, दुसरे दल का नेता मेरे यारो
फिर भी अपनी पार्टी के लोगो को साहूकार कह रहा !!

फेंक कर अपनी बातो के मोहरे, शतरंज का खेल खेल रहे
नेता जी अपने आप ही अपनी बातों से दुनिया को घेर रहे
कौन हिन्दू, कौन मुसलमान, यह भेद भाव को बढ़ा रहे
इलेक्शन के बाद, देखना इन सब में होगा मेल मिलाप, सब देख रहे !!

ऐसा लगता है रोजाना इनकी बातो से न जाने क्या कह देंगे
कुछ घर के भेदी ही, इनके बीच अपना अपना घर ढा देंगे
परसों को सब को गले मिलते देखेगी यह मतदान करती हुए जनता
फिर खुद अपने ही बुने जालों में यह, फिर सब को घेर देंगे !!

जिस की जहाँ आस्था थी, उस ने वहां जाकर मतदान किया
कुछ की आस्था थी, नोटा पर, उस ने वहां वो विशेष किया
हमने वो किया, जो नेता जी ने कहा था, मत ....दान. करो ??
तो हमने न जाकर, घर पे रहकर, कहना माना,,नहीं मतदान किया !!

अजीत तलवार
मेरठ

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