Sunday, 2 March 2014

मेरी भी सुन ओ शंकर लाल


@@@@@ मेरी भी सुन ओ शंकर लाल @@@@@@

चल जल्दी चल, भोले के द्वार
आज वहां पर बड़ी है छाई बहार
दूर से वो भी घर से निकला आज
जो कभी भी नहीं आया तेरे द्वार !!

शिवलिंग पर जल चढाने को
तड़प रहा आज सारा संसार
झट से स्वीकार करो मेरा जल
में उठा लाया सारा हरिद्वार !!

देखो बाबा में बेर लाया तेरे लिए
बेल पत्र क्या सारा पेड़ लाया तेरे लिए
आज तिलक करून, तुझे मेवा खिलाऊ
बस अब तू कर दे मेरा बेडा पार !!

परवाह नहीं की अपने पैर तोड़ लिए
तुझ से मिलने को घर बाहर छोड़ दिए
तेरी प्यास तो शाम तक बुझ जाएगी
बस मेरी भी बुझा दे तू इस बार !!

घर में इक बहु की कमी है, भाभी को दे दे लाल
माँ की भी बाबा पूरी कर दे तू बची खुची आस
घर मेरा खुशियन से भर जाये, धन हो मेरा अपार
यही इक आस बाकि है, मान जा न ओ शंकर लाल !!

जय शिव शंभू

अजीत तलवार
मेरठ

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