मेरी परेशानिआं तो पहले ही कम न थी
तूं चला आया सितम ढाने को
खुद को हंसाने को
और मुझ को रूलाने को
बड़ा मायूस सा चेहरा
बनकर दिखाई दिया
शायद मेरी उलझती
हुई परेशानी पर
आज काफूर सा
लग रहा है
तूं मेरी दिल;पर
तयार है फिर सितम ढाने को
खुद को तो समझाना
बड़ा मुश्किल सा लगा
अभी हल नहीं निकला मेरी
परेशानी का, तुझे किस
ने भेजा जरा यह तो बता
मेरी उलझनों को जाल में
बुनकर फिर से रूलाने को !!
तूं चला आया सितम ढाने को
खुद को हंसाने को
और मुझ को रूलाने को
बड़ा मायूस सा चेहरा
बनकर दिखाई दिया
शायद मेरी उलझती
हुई परेशानी पर
आज काफूर सा
लग रहा है
तूं मेरी दिल;पर
तयार है फिर सितम ढाने को
खुद को तो समझाना
बड़ा मुश्किल सा लगा
अभी हल नहीं निकला मेरी
परेशानी का, तुझे किस
ने भेजा जरा यह तो बता
मेरी उलझनों को जाल में
बुनकर फिर से रूलाने को !!
अजीत
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